(हरिगंधा के अप्रेैल-मई 2014 में प्रकाशित लघुकथा)
अदब- ज़रा ये तो बताना... तुम नक़ाब क्यों लगाती हो?
अदीबा- बस यूँ ही... अच्छा लगता है। ख़ुद को सेक्योर
फील करती हूँ।
अदब- तो क्या वो तमाम लड़कियाँ इनसेक्योर होती हैं,
जो नक़ाब नहीं लगातीं?
अदीबा- नहीं... ऐसा मैंने कब कहा?
अदब- तुम्हारी बातों से तो ऐसा ही लगा...



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