भारत कभी सोने की चिड़िया तो
कभी गुलामों का देश रहा। भारत कभी पंचशील सिद्धांत के कारण विख्यात रहा। भारत कभी
विकासशील, दलित-दमित देशों का उद्धारक तो कभी अगुआ रहा। भारत कभी सोवियत संघ और
अमेरिका के बीच शीतयुद्ध के दौरान तीसरी शक्ति यानी गुट-निरपेक्ष आंदोलन का जनक रहा।
भारत कभी सोवियत संघ के प्रभाव में समाजवाद की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने वाला
देश रहा। भारत अमेरिका के पूंजीवादी और विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने
वाला देश भी रहा। जब कभी अफ्रीकी, एशियाई या फिर लातीन अमेरिकी ग़रीब मुल्क संकट
में पड़ा, उसको संबल और मदद पहुंचाने वाला पहला देश भी भारत ही रहा।
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