उनका सोचना था
कि देश हिन्दुओं का था
कुछ लोग मुसलमानों
को जगा रहे थे
उनका सोचना था
कि देश मुसलमानों का था
कुछ लोग राजे-रजवाड़ों
का जगा रहे थे
उनका सोचना था
कि देश राजाओं का था
कुछ लोग दलितों-वंचितों
को जगा रहे थे
उनका सोचना था
कि देश दलितों-वंचितों का था
सभी टुकड़ों में
जनता को जगा रहे थे
और जनता थी कि
सोई पड़ी थी
कोई कुनमुनाता
तो कोई बड़बड़ाता